Koi Khaas Nahi..

Koi tere 

कोई तेरे से पूछे, कौन हूँ मैं?
तो बोल देना, कोई खास नही..

एक दोस्त है, कच्चा-पक्का सा
एक झूठ है, आधा सच्चा सा..

जज़्बात को ढँके, एक सफ़ेद पर्दा
पूरा नही है, बस हिस्सा मेरा आधा..

बस एक बहाना, अच्छा सा
हो कर बे-गाना, लगे अपना सा..

दीवाना है, थोड़ा पाग़ल सा
जान कर भी, अनजाना सा.

ज़िन्दगी का, ऐसा साथी है
जो दूर ना हो करपास भी नहीं..

कोई तेरे से पूछे, कौन हूँ मैं
बस.. वही कहना, कोई खास नही !!

पुरुषोत्तम

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