मेरी आँखें

मेरी आँखें 

मेरी आँखें खरीदोगे.. ??

बोहोत मजबूर हालात में मुझे नीलाम करनी हैं..
कोई मुझे नगद ही दे-दे,
मैं थोड़े दाम ले लूंगा जो मिले,
पहली बोली उसी के नाम कर दूंगा..

मुझे बाज़ार वाले कह रहे हैं कम अक़्ल हो तुम !
सुनो लोगों..
नहीं हूं मैं, कोई हिज्र का ख़्वाब..
नफ़ा और नुकसान का शतरंज नही मैं खेलने आया..

बड़ी मेहबूब हैं, मुझको ये मेरी नम आँखे..
मग़र अब बेचता हूँ के, मैंने एक ख़्वाब देखा था..

उसे अपना बनाने का..
उसे दिल मे बसाने का..
मुझे उस ख़्वाब का जुर्माना भरना है..

अब बस इन्हें नीलाम करना है।

-Purushottam

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